9 दिन में दूसरे भाई की संदिग्ध मौत:

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​9 दिन में दूसरे भाई की संदिग्ध मौत: दमोह में चुनावी रंजिश का आरोप, परिजनों ने शव रखकर किया चक्का जाम

​दमोह/पटेरा। दमोह जिले के पटेरा थाना क्षेत्र के शिकारपुरा गाँव में 9 दिन के भीतर एक ही परिवार के दूसरे सदस्य की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 18 सितंबर को जहाँ छोटे भाई देवेंद्र लोधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, वहीं अब शुक्रवार शाम को उनके बड़े भाई दशरथ लोधी का शव खेत में मिला है। परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए चुनावी रंजिश का आरोप लगाया है।

​बड़े भाई का शव मिलने पर फूटा गुस्सा

​शुक्रवार शाम दशरथ लोधी का शव खेत में मिलने के बाद परिवार के सदस्य उन्हें ज़िला अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर दमोह-पटेरा मार्ग पर बमनपुरा तिराहे पर दशरथ लोधी का शव रखकर चक्का जाम कर दिया।

​परिजनों का सीधा आरोप: “हत्यारों के बेटों ने की हत्या

​परिजनों का आरोप है कि देवेंद्र लोधी की हत्या के मुख्य आरोपी मोती सिंह लोधी के बेटों—गनपत, मोहित और उमेश—ने ही दशरथ लोधी की भी हत्या की है।

​परिजनों ने पटेरा पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पहले मामले में पुलिस ने ठीक से कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण आरोपियों ने उनके दूसरे परिजन की हत्या कर दी।

​प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें

​आक्रोशित परिवार और ग्रामीणों की मुख्य मांगें थीं:

​आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाए।

​पटेरा थाना प्रभारी (टीआई सरोज सिंह) को तत्काल निलंबित किया जाए।

​पुलिस और प्रशासन की पहल

​सूचना मिलते ही हटा एसडीओपी प्रशांत सुमन और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हटा, कुम्हारी, राजपुरा और रनेह थानों का बल तैनात किया गया।

बाद में, एडिशनल एसपी सुजीत सिंह भदौरिया स्वयं जाम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और ग्रामीणों को नियम अनुसार सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
​एडिशनल एसपी के आश्वासन और हस्तक्षेप के बाद, ग्रामीणों ने करीब दो बजे से लगा चक्का जाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद दमोह-पटेरा मार्ग पर आवागमन बहाल हो सका। पुलिस अब दोनों मामलों की गहनता से जाँच कर रही है।

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