​सोशल मीडिया मीम पर अमानवीय सज़ा! युवक से पैर धुलवाकर पानी पीने को मजबूर किया..

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​सोशल मीडिया मीम पर अमानवीय सज़ा! युवक से पैर धुलवाकर पानी पीने को मजबूर किया

दमोह। दमोह जिले के पटेरा ब्लॉक के सतरिया गांव से एक बेहद अमानवीय और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक परसोत्तम कुशवाहा को सोशल मीडिया पर एक मीम (Meme) पोस्ट करने की ऐसी तालिबानी सजा दी गई कि उसने न केवल गांव के एक अन्य युवक के पैर धोए, बल्कि वही पानी पीने के लिए भी मजबूर किया गया। इसके साथ ही, उससे समस्त ब्राह्मण समाज से माफ़ी मंगवाई गई और 5,100 रुपये का अर्थदंड भी वसूला गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला?

​घटना की जड़ गांव में लागू शराबबंदी और उससे जुड़ी एक पूर्व घटना है।

  1. शराबबंदी का उल्लंघन: सतरिया गांव में सर्वसम्मति से शराबबंदी लागू थी। इसके बावजूद, गांव का एक युवक अन्नू पांडे शराब बेच रहा था। शिकायत मिलने पर वह पकड़ा गया।
  2. पहली सज़ा: गांव के फैसले के अनुसार, अन्नू पांडे को गांव में घूमकर माफी मांगने और 2,100 रुपये का अर्थदंड देने की सज़ा दी गई थी कि वह भविष्य में शराब नहीं बेचेगा। अन्नू ने यह सज़ा पूरी की, जिसका वीडियो भी बनाया गया।
  3. मीम बनाना: इसी बीच, परसोत्तम कुशवाहा ने अन्नू पांडे के माफ़ी मांगने वाले वीडियो का इस्तेमाल करके AI के माध्यम से एक मीम बनाया। इस मीम में अन्नू पांडे को जूते की माला पहने दिखाया गया था, जिसे परसोत्तम ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया।
  4. मीम डिलीट, फिर भी विवाद: विवाद बढ़ने के डर से परसोत्तम ने 15 मिनट के अंदर ही मीम डिलीट कर दिया और माफ़ी भी मांग ली। लेकिन, अन्नू पांडे ने इस पर आपत्ति जताते हुए परसोत्तम और उसके परिवार को कथित तौर पर गालियां दीं।

अमानवीय सज़ा:

​मीम को ‘समस्त ब्राह्मण समाज का अपमान’ बताकर सतरिया और आस-पास के ब्राह्मण समाज के लोग एकजुट हुए। जबकि यह मामला मूल रूप से दो व्यक्तियों के बीच का था।

​इसके बाद, परसोत्तम कुशवाहा को पंचायत में बुलाया गया। गांव के लोगों ने फोटो डालना गलत ठहराया, जिसके बाद परसोत्तम ने अपनी गलती मानी और माफ़ी मांगने की बात कही। लेकिन, सिर्फ़ माफ़ी काफी नहीं रही। वायरल वीडियो के अनुसार:

  • ​परसोत्तम कुशवाहा को अन्नू पांडे के पैर धोने के लिए विवश किया गया।
  • ​पैर धोने के बाद परसोत्तम को वही पानी पीने के लिए मजबूर किया गया।
  • ​उससे सार्वजनिक रूप से समस्त ब्राह्मण समाज से माफ़ी भी मंगवाई गई।
  • ​उस पर 5,100 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

पीड़ित परिवार डरा हुआ:

​सबसे हैरानी की बात यह है कि इस अमानवीय कृत्य के दौरान कुशवाहा समाज के लोग भी मौके पर मौजूद थे। पीड़ित परसोत्तम का परिवार घटना से इतना डरा हुआ है कि वह पुलिस में कोई शिकायत नहीं करना चाहता।

​दमोह के इतिहास में इस तरह की अमानवीय घटना पहली बार सामने आई है, जिसने सभी जिम्मेदार नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है और यह बड़ा सवाल खड़ा किया है कि क्या किसी भी गलती की सज़ा इस तरह का अमानवीय कृत्य हो सकता है?

​यह घटना दमोह में सोशल मीडिया से जुड़े हालिया विवादों की शृंखला में एक और कड़ी है, इससे पहले ‘चप्पलबाज महिला शिक्षक’ का मामला भी ख़बरों में था।

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