दलित मुख्य न्यायाधीश के अपमान पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन..
दमोह। प्रदेश अनुसूचित विभाग के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर, ज़िला अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष अजय जाटव के नेतृत्व में, ज़िला न्यायालय के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दलित वर्ग से आने वाले भावी मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के विरुद्ध एक अधिवक्ता द्वारा की गई “दूषित मानसिकता वाली अशोभनीय और अमर्यादित टिप्पणी” और “जूता फेंकने के प्रयास” को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना को लेकर कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।
ज्ञापन देते समय, जिला कांग्रेस अध्यक्ष मानक पटेल ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी यदि देश की प्रमुख सर्वोच्च न्यायालय में किसी दलित मुख्य न्यायाधीश का अपमान किया जा सकता है, तो सामान्य व्यक्ति देश में कितना सुरक्षित होगा।
अनुसूचित जाति विभाग के जिलाध्यक्ष अजय जाटव ने इस कृत्य को सोची-समझी साज़िश बताते हुए कहा कि यह “भाजपा एवं आरएसएस से जुड़ी मानसिकता वाले अधिवक्ता” का काम है, जिसे केंद्र एवं राज्य सरकारों का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने मांग की कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन में शामिल ज़िला दमोह न्यायालय के अधिवक्ताओं ने भी अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। अधिवक्ता वीरेन्द्र दबे सहित अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि “जब देश की सर्वोच्च न्यायालय में दलित जज का अपमान हो सकता है, तो निचली अदालतों में फिर कोई सरफिरा अधिवक्ता कुछ भी कर सकता है।”
इस अवसर पर मनु मिश्रा, संजय चौरसिया, लालचंद राय, परम यादव, विजय बहादुर, नितिन मिश्रा, वीरेन्द्र राजपूत, भूपेन्द्र आजवानी, बबलू भट्ट, कमला निषाद, प्रफुल्ल श्रीवास्तव, रियाज खान, खिल्लू ठाकुर, अभितेन्द्र यादव, अनुज ठाकुर, और अधिवक्ताओं में अनुनय श्रीवास्तव, नारायण चक्रवर्ती, मुख्तार जाफरी, डिम्पल बेन, लक्ष्मण ठाकुर, अमित ठाकुर, राजेन्द्र चौधरी, असमल खान, शाहिद खान, नीरज भारत अहिरवार, तथा दलित समाज से मानक अहिरवार, हुकुमचंद, सोनू गायकवाढ़, राजा अहिरवार, दिलीप अहिरवार, पप्पू कसोटया, गोपाल मासाब, दीपक अहिरवार, प्रदीप अहिरवार, नीरज लक्ष्मण, हेमेन्द्र अहिरवार, यशवंत अठ्या, हरिशंकर अहिरवार, धनसिंह, खुमान सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और नारेबाजी की।
विरोध प्रदर्शन करने वालों ने एकजुट होकर दलित न्यायाधीश के अपमान को देश और संविधान का अपमान बताया और केंद्र तथा राज्य सरकार से इस गंभीर मामले में तुरंत और कठोर कार्रवाई की मांग की।



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