काले कारनामे’ छुपाने के लिए सचिव ने रचा ‘प्रपंच’, झूठे आरोप लगाकर मांगी माफ़ी; सर्विस रिकॉर्ड में खुली पोल..

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‘काले कारनामे’ छुपाने के लिए सचिव ने रचा ‘प्रपंच’, झूठे आरोप लगाकर मांगी माफ़ी; सर्विस रिकॉर्ड में खुली पोल

दमोह। जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों पर बार-बार झूठे आरोप लगाकर और आत्मदाह की धमकी देकर दबाव बनाने वाले एक पंचायत सचिव के कारनामों का खुलासा उसके सर्विस रिकॉर्ड से हुआ है। रिकॉर्ड के मुताबिक, यह सचिव जहाँ भी पदस्थ रहा, वहाँ उसने वित्तीय अनियमितताएँ, गबन और अनुशासनहीनता की है।

​अपने ‘काले कारनामों’ को छिपाने और भ्रष्टाचार जारी रखने के लिए सचिव अब अधिकारियों पर झूठे आरोप लगाने का ‘पुराना हथकंडा’ अपना रहा था, लेकिन जब उसे अधिकारियों के सामने बुलाया गया, तो उसने एक बार फिर अपनी गलती स्वीकार की, झूठे आरोप लगाना स्वीकारा और माफ़ी मांग ली, जिसके बाद मामला बंद कर दिया गया।

सेवा रिकॉर्ड में अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त:

  • गबन और वसूली: ग्राम पंचायत मुड़ारी जुझार, जनपद पंचायत दमोह में पदस्थी के दौरान सचिव ने निर्माण कार्यों की राशि का गबन किया था। इस राशि की वसूली सचिव से धारा 92 की कार्रवाई के तहत की गई थी।
  • आवास योजना में धांधली: ग्राम पंचायत बांसनी, जनपद पंचायत दमोह में भी पदस्थ रहते हुए सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्र हितग्राहियों को आवास का लाभ दिया, जिसके आधार पर उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
  • अशोभनीय भाषा और माफी: ग्राम पंचायत तिंदनी, जनपद पंचायत पटेरा में पदस्थी के दौरान सचिव ने जनपद पंचायत के आधिकारिक ग्रुप पर खंड पंचायत अधिकारी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और पैसों की मांग की। नोटिस मिलने पर सचिव ने झूठे आरोप लगाना स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी, लेकिन कुछ ही दिन बाद उसने दोबारा आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग किया, जिस पर कार्रवाई हुई।
  • नशे में दुर्व्यवहार और सामग्री चोरी: ग्राम पंचायत पिपरियाहथनी, जनपद पंचायत दमोह में सचिव रात-दिन शराब के नशे में रहता था और ग्राम पंचायत की हरिजन महिला सरपंच तथा ग्रामवासियों से अपशब्दों का प्रयोग करता था। इसके अलावा, वह ग्राम पंचायत की लाखों रुपये की सरकारी सामग्री (20 कुर्सी, 1 घूमने वाली कुर्सी, गोदरेज, लेपटॉप और एलसीडी सहित) अपने साथ ले गया था। इस गंभीर कृत्य के कारण उसे निलंबित किया गया था।
  • बार-बार अनुपस्थिति और निलंबन: इन हरकतों के कारण सचिव को किसी भी पंचायत में स्वीकार नहीं किया जाता। ग्राम पंचायत पिपरियाशाहनी और उसके बाद ग्राम पंचायत हरदुआमुड़र, जनपद पंचायत दमोह में पदस्थ किए जाने पर भी सचिव ने अपने पदस्थापना स्थल पर उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, जिसके कारण उसे पुनः निलंबित कर दिया गया।

माफ़ी मांगकर खत्म किया मामला:

​अपनी इन काली करतूतों को छिपाने और बहाली पाकर फिर से भ्रष्टाचार करने के लिए सचिव ने अधिकारियों पर झूठे आरोप लगाए। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत के अनुसार, जब सचिव को समक्ष में बुलाकर मामले की जाँच की गई, तो उसने ‘अपनी गलती स्वीकार कर झूठे आरोप लगाना स्वीकार किया’ और माफी मांग ली, जिसके बाद मामला बंद कर दिया गया।

​जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि सचिव द्वारा आरोप पत्र का जवाब देने पर निकट भविष्य में उचित पंचायत का चयन कर उसे पदस्थ किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सचिव का निलंबन अवधि का वेतन, शासन से आवंटन प्राप्त न होने के कारण लंबित था, जिसे तत्काल भुगतान करा दिया गया है।

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