दमोह मिशन अस्पताल फर्जी डॉक्टर मामला: जनरल मैनेजर विजय लेम्बर्ट और फरार डॉ. अजय लाल की जमानत याचिकाएं खारिज..

Spread the love

दमोह। मिशन अस्पताल दमोह में कथित अवैध कैथ लैब के संचालन और मरीजों की संदिग्ध मौतों से जुड़े गंभीर मामले में अदालत ने दो आरोपियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने गिरफ्तार हो चुके अस्पताल के जनरल मैनेजर विजय लेम्बर्ट की नियमित जमानत याचिका और फरार चल रहे डॉ. अजय लाल की द्वितीय अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने ख़ारिज की याचिकाएं..

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिशन अस्पताल के फर्जी कैथ लैब मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने विजय लेम्बर्ट और डॉ. अजय लाल की जमानत याचिकाओं को निरस्त करने का निर्णय लिया।

विजय लेम्बर्ट, जो अस्पताल में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे, उन्हें 13 अक्टूबर 2025 को हल्द्वानी, उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया था।

डॉ. अजय लाल अभी भी फरार चल रहे हैं, लेकिन उनकी ओर से प्रस्तुत द्वितीय अग्रिम जमानत आवेदन को भी न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।

समानता का तर्क खारिज..

​डॉ. अजय लाल के वकील ने दलील दी थी कि सह-अभियुक्त आशिमा न्यूटन को हाईकोर्ट जबलपुर ने 6 अक्टूबर 2025 को अग्रिम जमानत का लाभ दिया है, इसलिए समानता के आधार पर डॉ. अजय लाल को भी राहत मिलनी चाहिए।

​हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा: “आवेदक की स्थिति सह-अभियुक्त आशिमा न्यूटन से भिन्न है तथा अभियोजन कथानक के अनुसार उनके विरुद्ध ठोस साक्ष्य मौजूद हैं।” कोर्ट ने यह भी पाया कि डॉ. लाल की प्रथम अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी थी और कोई “परिस्थितिगत परिवर्तन” नहीं हुआ है, जो जमानत के लिए आधार बन सके।

न्यायालय का निर्देश..

​दोनों आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि “विजय लेम्बर्ट और डॉ. अजय लाल की जमानत अर्जी खारिज की जाती है। आदेश की प्रति केस डायरी सहित थाना कोतवाली दमोह को प्रेषित की जाए तथा अभिलेखागार में जमा किया जाए।”

क्या है पूरा मामला ?

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) दमोह द्वारा अप्रैल 2025 में की गई जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि मिशन अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में कैथ लैब का संचालन बिना उचित पंजीयन और अनुमति के किया जा रहा था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ों में डॉ. अखिलेश दुबे के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए थे। इसके अतिरिक्त, डॉ. नरेंद्र जॉन केम द्वारा की गई एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी प्रक्रियाओं के दौरान कुछ मरीजों की मृत्यु भी हुई थी।

​इन गंभीर आरोपों के आधार पर थाना कोतवाली दमोह में अपराध क्रमांक 245/2025 के तहत अस्पताल प्रबंधन समिति के कई सदस्यों और अधिकारियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(2), 340(2), 105, 3(5) सहित म.प्र. उपचार गृह अधिनियम की धाराओं में नामजद किया गया है।

About The Author

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com