स्वदेशी मेला 2025 छठवां दिवस..

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मंच पर शिव आराधना के साथ सुमधुर भक्ति गीतों को सुन मंत्रमुग्ध हुए दर्शक..

दोपहर में महिलाओं के स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ रस्साकसी में हुई जोर आजमाइश..

दमोह। स्वदेशी भारतवर्ष फाउंडेशन और स्वदेशी जागरण मंच के तत्वाधान में नगर के तहसील ग्राउंड में आयोजित हो रहे 11 दिवसीय स्वदेशी मेले के छठवें दिवस आयोजन स्थल पर नारी शक्ति समागम के तहत आयोजित प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का बोलबाला रहा। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री लखन पटेल ने भी मेला स्थल पहुंचकर मेले का भ्रमण किया और स्वदेशी पर अपने विचार रखे।

गीत, संगीत के साथ नृत्य की प्रस्तुति

शाम को मंचीय कार्यक्रमों की श्रृंखला का प्रारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा भारत माता और दत्तोपंत जी ठेंगड़े के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में अमरकंटक विश्वविद्यालय के डीन डॉ विकास सिंह, अतिथि के रूप में रंगकर्मी राजीव अयाची, संजय खरे, एडवोकेट गिरिजा त्रिपाठी, लायंस क्लब से राकेश अग्रवाल, जन अभियान परिषद से सुशील नामदेव, एमएलबी स्कूल प्राचार्य डॉ आलोक सोनवलकर और नर्मदा सिंह एकता रहे। अतिथियों का स्वागत मेला समिति के सदस्यों के द्वारा परंपरागत तरीके से किया गया। अपने उद्बोधन में डॉक्टर विकास सिंह ने स्वदेशी के महत्व उपयोगिता और स्वदेशी से हमारे जीवन में आने वाले बदलावों को के साथ सशक्त भारत के लिए इसके महत्व को भी बताया।

इसके बाद प्रारंभ हुई मंचीय प्रतियोगिताओं मेंअनहद कला केंद्र के द्वारा कत्थक नृत्य की प्रस्तुति, शिव कैलाश नृत्य के साथ, प्रसिद्ध बुंदेलखंडी गायक बृजेश ब्रज और उनकी टीम के द्वारा पारंपरिक और धार्मिक गीतों की विशेष प्रस्तुति दी गई। प्रसिद्ध कवियों द्वारा लिखे गए दोहे और गीतों को अपने अलग भाव में प्रस्तुत कर बृजेश ब्रज और उनकी टीम ने दर्शकों को बांधे रखा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों के द्वारा पूर्व में आयोजित हुई मांढ़ने प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता, बिजना सजाओ प्रतियोगिता,पूजा स्थल प्रतियोगिता, बॉस की टोकनी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

राज्य मंत्री ने मेले का लिया आनंद
छठवें दिन मेला परिसर में राज्यमंत्री लखन पटेल मेले का आनंद लेने के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेले में लगाए गए विभिन्न स्तरों का अवलोकन किया और व्यापारियों से चर्चा भी की। मेला परिसर में कलाकारों द्वारा अपनी कला से तैयार वस्तुओं के स्टाल भी लगाए गए हैं जिसका अवलोकन करते हुए उन्होंने कलाकारों की कला की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर, स्वदेशी उत्पादों की शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की भावना का सजीव प्रतीक है। आयोजन समिति द्वारा स्वदेशी ग्राम की परिकल्पना और ग्रामीण जीवन की झलक प्रस्तुत करने का प्रयास सराहनीय है,स्वदेशी मेला न केवल स्थानीय शिल्पकारों और उद्यमियों को प्रोत्साहन देता है, बल्कि समाज को स्वदेशी विचार के प्रति जागरूक भी करता है।

बच्चों और महिलाओं की प्रतियोगिता

स्वदेशी मेला के दोपहर में प्रतिदिन अलग-अलग प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। इन प्रतियोगिताओं में नारी शक्ति समागम के तहत व्यंजन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं ने अलग-अलग प्रकार के स्वदेशी व्यंजनों को तैयार किया। इसके अलावा बच्चों के लिए रस्साकसी और शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है जिसमें शतरंज के सेमीफाइनल मैच छठवें दिन खेले गए।

स्कूली छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं
स्वदेशी मेला 2025 का दोपहर में आनंद लेने के लिए स्कूली छात्र भी बड़ी संख्या में मेला परिसर में उमड़ रहे हैं। स्कूली बच्चों को स्वदेशी विचारों को समझने और उससे जोड़ने के लिए आयोजन समिति ने विशेष सुविधाएं मेला परिसर में दी है। विद्यालयों की तरफ से आने वाले छात्रों को मेले में लगाए गए झूलो के शुल्क को 50 प्रतिशत कम किया गया है जिससे कम शुल्क में बच्चे मेले का आनंद ले सकते है। इसके साथ ही स्कूली छात्रों के लिए विशेष खेल प्रतियोगिता के साथ उन्हें स्वदेशी विचार से अवगत कराया जा रहा है।
सातवें दिन नारी शक्ति संगम कार्यक्रम के तहत महिलाओं के लिए ऐतिहासिक वीरांगनाएं प्रतियोगिता के साथ अन्य खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी

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