स्वदेशी मेला 2025 सातवां दिवस..

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स्वदेशी मेला 2025 सातवां दिवस

मंच पर कवि सम्मेलन ने जगाया देशप्रेम और स्वदेशी का भाव, महिलाओं ने वीरांगनाओं का रूप धर कर किया नारी शक्ति के शौर्य को नमन

कार्यक्रम में संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख कैलाशचंद्र जी ने स्वदेशी सोच और सम्मान पर रखे विचार

मेला परिसर में नजर आ रहा मंचीय प्रस्तुतियों के साथ सामाजिक गतिविधियों का मिश्रण

दमोह। स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन और स्वदेशी की जागरण मंच के तत्वाधान में नगर के तहसील मैदान में आयोजित हो रहे स्वदेशी मेला 2025 के सातवें दिन मेला परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियां खेल प्रतियोगिताओं के साथ सामाजिक गतिविधियां आयोजित हुई। मंचीय प्रस्तुतियों की श्रृंखला में जहां ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से देश प्रेम, भारतीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति के गौरव का बखान किया, वही मुख्य वक्ता के रूप में संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख कैलाश चंद्र जी भाई साहब और स्वदेशी जागरण मंच के सीईओ साकेत जी राठौर के द्वारा विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे गए।

भारतीय मूल्यों को बचाने का दायित्व हम सभी पर : कैलाशचंद्र जी
मंचीय कार्यक्रमों का प्रारंभ परंपरा अनुसार भारत माता और स्वदेशी विचार के जनक दत्तोपंत जी ठेंगड़े के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख कैलाश चंद्र जी,अखिल भारतीय सह मेला प्रमुख और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के सीईओ साकेत जी राठौर,अध्यक्षता जिला संघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ डॉ. अश्विनी नामदेव, और मंच पर रामलाल जी पटेल,डॉ. विक्रांत सिंह चौहान,मेघा ताम्रकार, दीपक तिवारी, बृजेंद्र राठौर, डॉ सोनल राय,कमलेश पटेल,सुमित भगत रहे। इन सभी का स्वागत आयोजन समिति के दायित्ववान कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। वक्त के रूप में आए साकेत जी राठौड़ ने भारतीय बाजारों पर विदेशी कंपनियों द्वारा किए जा रहे प्रहार और उसके पीछे छिपी मंशा को समझाते हुए अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दूसरे दूसरे वक्ता कैलाश चंद्र जी ने भारतीय बाजारों और भारतीय संस्कृति को प्रभावित करने वाली विदेशी शक्तियों, कंपनियों और डीप स्टेट थ्योरी पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय उद्योगों और भारतीय संस्कृति के नैतिक मूल्यों के पतन के लिए एक विदेशी विचारधारा लगातार कार्य कर रही है। दशकों से यह सुनियोजित षड्यंत्र न सिर्फ हमारे उद्योगों और व्यापारियों को बल्कि नई पीढ़ी को भी भारतीय मूल्य से दूर ले जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हमें आज जागरूक होते हुए अपने बच्चों के बीच पारदर्शिता रखनी होगी, ताकि आगामी समय में वह ऐसे षडयंत्रों से बचकर भारतीय संस्कृति को मजबूत करने में तैयार रहे जिससे भारत के स्वाभिमान की जड़े मजबूत होगी और भारत विश्वशक्ति के रूप के अपनी पहचान बनाएगा।

नृत्य और कवि सम्मेलन ने रोशन रहा मंच
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में सबसे पहले दिव्या गुप्ता के द्वारा गायन व वादन दिव्या की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद नृत्य निर्देशक पंकज चतुर्वेदी के निर्देशन में
दशावतार की प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुतियों को दर्शकों ने अत्यधिक पसंद किया। दिवस की मुख्य प्रस्तुति के रूप में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें कवि सम्मेलन प्रभारी अमर सिंह राजपूत के साथ कवियों ने देशप्रेम और भारतीय संस्कृति के सम्मान से ओतप्रोत कविताओं की प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों की वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन में कवि अमर सिंह राजपूत, डॉ रघुनंदन चिले, डॉ. गणेश राय, बीएम दुबे, नरेंद्र अरजरिया, राजीव अयाची, पीएस परिहार, आशीष तंतुवाय, भूपेंद्र जैन, डॉ प्रेमलता नीलम, काव्या मिश्रा, श्रीमती सीमा जाट, श्रीमती बबीता चौबे, श्रीमती मनोरमा रतले, श्रीमती सुधा कनोजे शामिल रही।

मेला परिसर में चिकित्सकों ने दी निशुल्क सेवाएं

मेला में आयोजित हो रही सामाजिक गतिविधियों की श्रृंखला में निशुल्क नेत्र, त्वचा, गठियाबाद एवं सिरदर्द रोग परामर्श शिविर आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मयंक प्यासी, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति त्रिपाठी ने निःशुल्क सेवाएं दो दिवस दे रहे है। नारी समागम कार्यक्रम के तहत हुए आयोजन में मातृशक्ति ने भारतीय वीरांगनाओं का रूप धर उन्हें अपनी आदरांजलि दी। इसके साथ ही प्रतिदिन मेला परिसर में आने वाले सैकड़ों स्कूली छात्रों को स्वदेशी विषय पर बौद्धिक देते हुए उन्हें स्वदेशी और स्वावलंबन से अवगत कराया गया। इसके अलावा स्कूली छात्राओं ने जलेबी दौड़ प्रतियोगिताओं ने अपना हुनर दिखाया।

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