​आर्थिक तंगी की बलि चढ़ा हंसता-खेलता परिवार: दमोह में पति, गर्भवती पत्नी और 2 साल की मासूम ने दी जान..

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​दमोह/तेंदूखेड़ा |
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1 में एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने फांसी लगाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली। मृतकों में पति, उसकी गर्भवती पत्नी और दो साल की दुधमुही बच्ची शामिल है। एक साथ घर से उठी तीन अर्थियों को देख पूरे नगर की आंखें नम हो गईं और क्षेत्र में मातम छाया हुआ है।


​बेटी के मुंडन की थी तैयारी, घर में था खुशियों का माहौल
​जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय मनीष केवट अपनी 24 वर्षीया पत्नी यशोदा उर्फ माही और 2 साल की बेटी आरोही के साथ रहता था। मनीष मजदूरी कर परिवार चलाता था। बताया जा रहा है कि आरोही के मुंडन संस्कार के लिए परिवार को बांदकपुर जाना था, जिसके लिए मनीष ने रिश्तेदारों को न्योता भी दे दिया था। घर में खुशियों की तैयारी चल रही थी, लेकिन किसे पता था कि यह खुशियाँ चंद घंटों में मातम में बदल जाएंगी।


​मदद की गुहार और रिश्तों की बेरुखी बनी वजह!


​सूत्रों के अनुसार, मनीष की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मुंडन के खर्च के लिए वह कुछ रिश्तेदारों के पास आर्थिक मदद मांगने गया था। चर्चा है कि वहां किसी रिश्तेदार से उसकी कहासुनी हो गई और उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। घर लौटने पर मनीष अत्यधिक तनाव और निराशा में था। संभवतः इसी अपमान और आर्थिक तंगी के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।


​खिड़की से झांका तो उड़ गए होश


​गुरुवार दोपहर जब मनीष के घर का दरवाजा काफी देर तक नहीं खुला, तो पड़ोसियों को संदेह हुआ। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी रावेंद्र बागरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जब पुलिस ने खिड़की से अंदर देखा तो तीनों के शव फंदे पर लटक रहे थे। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शवों को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


​पुलिस का पक्ष:


“घटना की सूचना मिलते ही हम मौके पर पहुंचे थे। खिड़की से देखने पर तीनों के शव फंदे पर लटके मिले। फिलहाल आत्महत्या का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और साफ होगी।”


— रावेंद्र बागरी, थाना प्रभारी, तेंदूखेड़ा
​एक साथ खत्म हुई तीन जिंदगियां
​इस हृदयविदारक घटना में न केवल मनीष और यशोदा की जान गई, बल्कि उस मासूम आरोही की भी सांसें थम गईं जिसे अभी दुनिया देखनी थी। साथ ही, यशोदा के गर्भ में पल रहे नवजात की भी मौत हो गई। इस घटना ने समाज में आर्थिक अभाव और मानसिक दबाव के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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