सीसीआरटी क्षेत्रीय केंद्र दमोह की 10 दिवसीय कार्यशाला संपन्न..
चार राज्यों से आए 29 शिक्षकों ने ली सहभागिता..
दमोह |
सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), क्षेत्रीय केंद्र, दमोह द्वारा “विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश” विषय पर आयोजित 10 दिवसीय कार्यशाला का समापन मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र सिंह के आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला में भारत के चार विभिन्न राज्यों/संघ-शासित प्रदेशों से आए कुल 29 शिक्षक प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र दुबे ने सीसीआरटी, क्षेत्रीय केंद्र दमोह की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना की और इसे विद्यालयी शिक्षा को व्यवहारिक एवं रचनात्मक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस अवसर पर देवनारायण रजक (क्षेत्राधिकारी) ने सीसीआरटी के उद्देश्यों, कार्यों एवं कार्यशाला की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को पारंपरिक हस्तकला कौशल से जोड़कर उसे विद्यालयी पाठ्यक्रम से समन्वित करना है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को मैक्रम, बांस शिल्प, मिट्टी शिल्प एवं गोंड पेंटिंग जैसी पारंपरिक भारतीय हस्तकलाओं का प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत प्रतिभागियों को हथकरघा केंद्र, कुंडलपुर एवं रंगमहल, हटा का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें स्थानीय कला एवं संस्कृति को निकट से समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों को शिक्षक अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों तक पहुंचाकर भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में योगदान



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