विशाल हिन्दू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब, सनातन और राष्ट्र चेतना का किया गया आह्वान..

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विशाल हिन्दू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब, सनातन और राष्ट्र चेतना का किया गया आह्वान..
दमोह। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत गुरुवार को दमोह नगर के पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के लोग उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य सनातन संस्कृति, सामाजिक जागरूकता एवं संघ के पंच परिवर्तन विषयों से समाज को जोड़ना रहा।


राष्ट्रीय संत साध्वी सरस्वती देवी का जबलपुर से दमोह आगमन हुआ, जहां मारुताल टोल टैक्स पर उनका स्वागत फूल मालाओं से किया गया। सर्किट हाउस में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई।

29 जनवरी की सुबह परशुराम टेकरी स्थित माता मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड तक पहुंची। मातृशक्ति द्वारा निकाली गई इस कलश यात्रा ने आयोजन को धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम स्थल पर सर्वप्रथम गौ माता का पूजन किया गया, तत्पश्चात भारत माता एवं राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण किया गया।


मंच पर विभिन्न समाजों एवं वर्गों के प्रमुखों को आमंत्रित कर उनका स्वागत किया गया। मुख्य वक्ता साध्वी सरस्वती देवी के साथ धर्म जागरण सह प्रचार प्रमुख प्रभात जी, विनोद मुडा जी, पंडित श्री रामदास चौबे जी, कथा वाचक वैष्णवी गर्ग जी, नंदिनी कुचबंदिया जी, समाजसेवी दिलीप राय जी, निधि गर्ग जी एवं प्रकाश बाबा जी मंचासीन रहे।


साध्वी सरस्वती देवी का उद्बोधन: नारी शक्ति, सनातन और संस्कारों पर जोर..


मुख्य वक्ता साध्वी सरस्वती देवी ने अपने उद्बोधन में सनातन धर्म, नारी शक्ति और पारिवारिक संस्कारों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्म छोड़ता है, वह कहीं भी चला जाए, मृत्यु के बाद उसे पंच महाभूतों में ही विलीन होना होता है। उन्होंने सनातन छोड़ चुके लोगों से घर वापसी का आह्वान करते हुए कहा कि हिन्दू समाज उन्हें तिलक लगाकर सम्मानपूर्वक स्वीकार करेगा।


महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नारी यदि महान होगी तो संतान भी महान बनेगी। उन्होंने जीजाबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि वही शिवाजी जैसे महान योद्धा को गढ़ सकती हैं। साध्वी सरस्वती देवी ने भाषा, शिक्षा और संस्कारों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अंग्रेजी से विरोध नहीं, लेकिन अपनी मातृभाषा हिंदी का सम्मान बनाए रखना चाहिए।


उन्होंने बच्चों में बढ़ते मोबाइल उपयोग और अश्लील कंटेंट को समाज के लिए गंभीर खतरा बताया और बच्चों को कम से कम 10 वर्ष की आयु तक मोबाइल से दूर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुपरमैन नहीं, बल्कि हनुमान जी जैसे आदर्शों की शिक्षा दी जानी चाहिए। महिलाओं से कुटुंब प्रबोधन के लिए आगे आने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को अपने सम्मान और आत्मरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।


पंच परिवर्तन, सामाजिक एकता और देशभक्ति की प्रस्तुतियों ने बांधा समां..


कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेविका समिति की शैलजा दीदी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक प्रभात जी ने भी अपने विचार रखे। शैलजा दीदी ने कहा कि हिन्दू समाज में संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों में आई कमी के कारण वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन विषयों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया और राष्ट्र के प्रति चेतना जागृत करने पर बल दिया।


सह प्रांत प्रचारक प्रभात जी ने संघ की स्थापना से लेकर आज तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ को रोकने और प्रतिबंधित करने के कई प्रयास हुए, लेकिन संगठन अपने विचारों के साथ मजबूती से खड़ा रहा और आज समाज में उसकी व्यापक स्वीकार्यता है।


मंचीय कार्यक्रमों में बच्चों एवं मातृशक्ति द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति और सनातन से जुड़ी प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित नृत्य नाटिका, देशभक्ति गीतों पर नृत्य और कविताओं का पाठ लोगों द्वारा सराहा गया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती एवं सहभोज के साथ किया गया।

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