आंगनबाड़ी सहायिका पद पर जारी पहली सूची से नदारद अभ्यर्थी के लिए बनाई गई दूसरी सूची..
लाखों के लेन-देन में सारे नियम-कायदे दरकिनार..
अंकसूची की जगह परीक्षा परिणाम को मान लिया गया मेरिट का आधार..
दमोह।
दमोह जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिका पद की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये के लेन-देन के जरिए चयन सूची में हेरफेर की गई और पहली सूची में शामिल ही न रहे अभ्यर्थी को दूसरी सूची में शीर्ष स्थान देकर चयनित कर दिया गया। इस पूरे मामले की चार बार कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अब तक विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पहली सूची में नंदनी सेन टॉप पर, चयन तय माना जा रहा था
बांसातारखेड़ा में नवीन आंगनबाड़ी केंद्र के विस्तार के बाद सहायिका पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। महिला बाल विकास विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया पूरी कर 56 अभ्यर्थियों की पहली सूची जारी की गई थी। इसमें 68.5 प्रतिशत अंकों के साथ नंदनी सेन पहले स्थान पर थीं, जिससे उनका चयन लगभग तय माना जा रहा था।
इसी सूची में 11वें स्थान पर रहीं निकिता गौड़ (65 प्रतिशत) ने दावा-आपत्ति दर्ज कराई कि उनके जाति प्रमाण-पत्र के 5 अंक नहीं जोड़े गए हैं। यदि यह दावा स्वीकार होता, तो उनके कुल अंक 70 प्रतिशत हो जाते।
समीक्षा बैठक में ‘नाश्ते की टोकरी’ और नोटों के बंडल का आरोप
दावा-आपत्तियों की समीक्षा के लिए 17 दिसंबर को बांसा तारखेड़ा में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार अधिकारियों के लिए नाश्ते की टोकरी भेजी गई और साथ ही एक ऐसे अभ्यर्थी की ओर से नोटों के बंडल पहुंचाए गए, जिसका नाम पहली जारी की गई 56 अभ्यर्थियों की सूची में कहीं भी शामिल नहीं था। आरोप है कि इसी बैठक में पूरा चयन खेल खेला गया।
पोर्टल पर आई दूसरी सूची, 86 नाम शामिल
समीक्षा बैठक के बाद विभाग ने पोर्टल पर दूसरी सूची जारी की, जिसमें 86 अभ्यर्थियों के नाम शामिल कर दिए गए। इस सूची में 69.8 प्रतिशत अंकों के साथ आस्था ठाकुर को पहले स्थान पर दर्शाते हुए चयनित कर लिया गया। हैरानी की बात यह रही कि आस्था ठाकुर का नाम पहली सूची में कहीं भी दर्ज नहीं था।
वहीं पहली सूची में टॉप पर रहीं नंदनी सेन को दूसरे स्थान पर खिसका दिया गया और दावा-आपत्ति दर्ज कराने वाली निकिता गौड़ को 12वें स्थान पर पहुंचा दिया गया।
फर्जी दस्तावेज और अंक जोड़ने में अनियमितता के आरोप
शिकायतकर्ता नंदनी सेन ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आस्था ठाकुर से संबंधित दस्तावेज निकलवाए हैं। आरोप है कि चयन में अंकसूची के बजाय परीक्षा परिणाम को आधार बनाकर 10 अंक जोड़ दिए गए। इसके अलावा अन्य प्रमाण-पत्र भी निर्धारित तिथि के बाद बनवाए गए बताए जा रहे हैं। इन सभी तथ्यों को लेकर 9 दिसंबर, 17 दिसंबर, 23 दिसंबर और 27 जनवरी को कलेक्टर जनसुनवाई में लिखित शिकायत दी जा चुकी है।
‘जेन-जी की जिद’—अन्याय के खिलाफ आर-पार की लड़ाई
बीएससी गणित एवं एमएससी उत्तीर्ण नंदनी सेन का कहना है कि वह इस पूरे मामले को केवल अपने चयन से नहीं, बल्कि व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रही हैं। उनका कहना है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी कर नोटों के दम पर नियुक्ति कराई गई है, जिसके खिलाफ वह आवाज उठाती रहेंगी। अब वह इस मामले को लेकर एडीएम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रही हैं।
विभागीय अधिकारी का बयान
इस मामले में परियोजना अधिकारी कैलाश राय ने कहा,
“शिकायत प्राप्त हुई है, विभागीय जवाब प्रस्तुत कर दिया जाएगा। अब जो होना था हो गया है, उम्मीदवार को अब एडीएम कोर्ट में अपना मामला दायर करना चाहिए।”



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