दमोह देहात थाना पुलिस कस्टडी से 2 हजार का इनामी चोर फरार, कानून-व्यवस्था पर सवाल
पुलिस कस्टडी से फरार हुआ इनामी चोर, मचा हड़कंप
दमोह जिले के दमोह देहात थाना से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस अभिरक्षा में रखा गया 2 हजार रुपए का इनामी चोर संतोष पटेल पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। इस घटना के बाद जिले की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, फरार आरोपी को बीती रात थाने में रखा गया था, जहां से वह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर भाग निकला।
एसपी ने घोषित किया था इनाम, फिर भी कस्टडी से कैसे भागा आरोपी?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी द्वारा कुख्यात चोर संतोष पटेल पर 2 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। आरोपी को दमोह देहात थाना पुलिस ने एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक इनामी आरोपी थाने के अंदर से फरार हो सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है?
? थाना प्रभारी ने दिया उच्च अधिकारियों का हवाला..
इस पूरे मामले में जब दमोह देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा से चर्चा की गई, तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर सीधे जवाब देने के बजाय उच्च अधिकारियों का हवाला दिया।
घटना के बाद पुलिस ने फरार आरोपी की तलाश (खोजबीन) शुरू कर दी है, लेकिन अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
चोरी पीड़ित एडवोकेट के गंभीर आरोप, पुलिस पर सामान गोलमाल का शक..
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब चोरी पीड़ित एडवोकेट रामनारायण गर्ग ने पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि जोगी केशव नगर स्थित किराए के मकान में 15–16 दिसंबर की दरम्यानी रात चोरी हुई थी, जब वे उज्जैन गए हुए थे। चोरी में करीब 14 तोला सोना, ₹7 लाख नकद और ढाई किलो चांदी गायब हुई थी।
एडवोकेट गर्ग का आरोप है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान पुलिस ने पूरा माल बरामद नहीं किया और केवल 2 किलो चांदी जब्त कर मामले को निपटा दिया।
डीजीपी व गृह विभाग से शिकायत, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी..
एडवोकेट रामनारायण गर्ग ने दमोह देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा पर विवेचना को दूषित करने का आरोप लगाते हुए डीजीपी भोपाल और गृह विभाग में शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे हाईकोर्ट की शरण लेंगे। साथ ही पुलिस अधीक्षक दमोह से मांग की है कि थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और चोरी गया पूरा सामान वापस दिलाया जाए।
यह मामला अब केवल एक फरारी नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। आगे की कार्रवाई और जांच पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है।



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