दान नहीं, मनोकामनाओं का वरदान: कंचनपुरी का दिव्य दरबार बना आस्था का केंद्र..
पंचमुखी हनुमान के दरबार में बिना चढ़ावे पूरी होती हैं लाखों भक्तों की कामनाएं..

दमोह।
दमोह-तेंदूखेड़ा मार्ग पर अभाना से आगे व्यारमा नदी का राजघाट पुल पार करते ही पहाड़ी पर मंदिरों की एक भव्य श्रंखला दिखाई देती है। यह स्थान कंचनपुरी के नाम से प्रसिद्ध है, जहां ए-क्लास अधिकारी रहे गणेश सिंह दादा का दिव्य दरबार लगता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार यह ऐसा दरबार है जहां दान-पेटी नहीं रखी जाती, बल्कि यहां “मनोकामनाओं का दान” दिया जाता है।

सेवा और साधना का संगम..
गणेश सिंह दादा, जो हाल ही में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं, वर्ष 1984 से दरबार लगा रहे हैं। कॉलेज जीवन से शुरू हुआ यह सिलसिला नौकरी के दौरान भी जारी रहा। बीई की पढ़ाई के बाद शासकीय सेवा में रहते हुए भी उन्होंने सादगीपूर्ण जीवन जिया और स्वयं को पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित रखा।

उन्होंने गृहस्थ जीवन स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनके दरबार से मनोकामनाएं पूर्ण होने का दावा करने वाले हजारों परिवार आज सुखी जीवन जी रहे हैं। मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं दादा द्वारा अपने वेतन और सेवानिवृत्ति फंड से की गई बताई जाती हैं। वर्तमान में भी वे अपनी पेंशन से ही दरबार की व्यवस्था संचालित कर रहे हैं।
पंचमुखी हनुमान और मां शारदा का दरबार..
दादा के अनुसार कंचनपुरी हनुमान मंदिर में पंचमुखी हनुमानजी के साथ मां शारदा का दिव्य दरबार है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां विशेष पूजा-पाठ की आवश्यकता नहीं, केवल दर्शन मात्र से मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद मिलता है।

ऐसे अनेक भक्त हैं जो मनोकामना पूर्ण होने पर कुछ अर्पित करना चाहते हैं, लेकिन दादा का कहना है कि “हनुमानजी लेने वाले नहीं, देने वाले हैं।” इसी भावना के साथ यहां किसी प्रकार का दान नहीं लिया जाता।
त्रिदेव दर्शन और शिवरात्रि की विशेष लीला का दावा..
दादा गणेश सिंह ने यह भी दावा किया है कि उनके माध्यम से कई भक्तों को त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—के दर्शन हुए हैं। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि बांदकपुर जागेश्वर धाम में यज्ञ के दौरान भक्तों ने तीन दिव्य शक्तियों के दर्शन की बात कही, जिन्हें उन्होंने त्रिदेव का स्वरूप बताया।

इसी क्रम में उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि की रात्रि 12 बजे शंखध्वनि सुनाई देने और 15 मिनट तक “गौरी शंकर सीताराम, पार्वती शिव राधे श्याम” जाप करने का संदेश भक्तों को दिया गया था। कई श्रद्धालुओं ने उस रात्रि शंखध्वनि सुनने का अनुभव साझा किया है। दादा के अनुसार यह ईश्वरीय संकेत था कि भगवान विशेष लीला प्रदर्शित करेंगे।
जनप्रतिनिधियों से विकास की अपेक्षा..
इस क्षेत्र के विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी हैं, जो वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन में संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मस्व राज्यमंत्री भी हैं। कंचनपुरी दरबार से जुड़े श्रद्धालु मंदिर तक सड़क, पेयजल सुविधा और बाहरी भक्तों के लिए सामुदायिक भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन स्तर पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो यह स्थान एक प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में और विकसित हो सकता है।

कंचनपुरी का यह दरबार आस्था, सेवा और सादगी का अनूठा संगम माना जा रहा है। जहां एक ओर दान रहित व्यवस्था इसे विशिष्ट बनाती है, वहीं लाखों भक्तों की आस्था इसे दमोह जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में स्थापित कर रही है।



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