दमोह में एएसआई उप-मंडल कार्यालय का शुभारंभ, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
दमोह।
जिले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उप-मंडल कार्यालय के शुभारंभ के साथ ही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहले पुरातत्व से जुड़े कार्यों के लिए अधिकारियों को जबलपुर जाना पड़ता था, लेकिन अब दमोह में ही कार्यालय उपलब्ध होने से प्रक्रियाएं तेज और सुविधाजनक हो जाएंगी।
कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि दमोह जिला ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां नोहटा का शिव मंदिर, कोडल का प्राचीन शिव मंदिर, बांदकपुर धाम और कुंडलपुर धाम जैसे अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं। एएसआई कार्यालय खुलने से इन धरोहरों के संरक्षण और विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिले के ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। नोहटा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सौंदर्यीकरण सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही रानी दमयंती के किले के लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार की योजना है, जहां भविष्य में लाइट एंड साउंड शो भी प्रस्तावित है।
विधायक जयंत मलैया ने कहा कि एएसआई कार्यालय के लिए पुराने गिरजाघर भवन का उपयोग किया जाना सराहनीय निर्णय है। उन्होंने इसके लिए कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर की प्रशंसा करते हुए कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र पांचवीं से आठवीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध रहा है। एएसआई कार्यालय शुरू होने से इन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ उन ऐतिहासिक स्थलों की भी खोज हो सकेगी जो अब तक व्यापक रूप से सामने नहीं आ पाए हैं। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दमोह भविष्य में एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे ने कहा कि एएसआई का कार्यालय खुलने से जिले की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पहल से दमोह जैसे ऐतिहासिक जिले को यह महत्वपूर्ण सौगात मिली है। उन्होंने बताया कि जिले के कई गांवों में प्राचीन मठ, मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, जिनके संरक्षण और पुनरुद्धार की आवश्यकता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद् शिवाकांत बाजपेयी ने बताया कि जिस भवन में यह कार्यालय स्थापित किया गया है वह ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक इमारत है, जिसे स्थानीय स्तर पर गिरजाघर के नाम से जाना जाता है। पहले इसका उपयोग चर्च के रूप में होता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह भवन परित्यक्त पड़ा हुआ था। उन्होंने बताया कि दमोह में एएसआई उप-मंडल कार्यालय की स्थापना से जिले के राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों की देखरेख और संरक्षण कार्यों में काफी सुविधा मिलेगी। अभी तक इन स्मारकों का संचालन सागर उप-मंडल कार्यालय से किया जाता था, लेकिन अब दमोह में अलग कार्यालय होने से पुरातात्विक गतिविधियों को गति मिलेगी।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 14 संरक्षित स्मारक हैं। नए कार्यालय के शुरू होने के बाद इन स्मारकों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य भी तेज किए जाएंगे।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, डॉ. आलोक गोस्वामी, भरत यादव, हरिशचंद्र पटेल (गुड्डू पटेल), संतोष रोहित, कृष्णा पटेल, गौरव पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आलोक सोनवलकर ने किया।
दमोह में एएसआई उप-मंडल कार्यालय का शुभारंभ, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को मिलेगी नई दिशा..



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