सड़क हादसे रोकने सख्त निर्देश, सरकारी कार्यालयों में हेलमेट होगा अनिवार्य..

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दमोह को ‘जीरो फैटालिटी डिस्ट्रिक्ट’ बनाने का लक्ष्य, हेलमेट अनिवार्य करने के निर्देश..

उच्चतम न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने समीक्षा बैठक में दिए सख्त निर्देश..

सड़क हादसे रोकने सख्त निर्देश, सरकारी कार्यालयों में हेलमेट होगा अनिवार्य..

‘बिना हेलमेट नहीं मिलेगी हाजिरी’, दमोह में सड़क सुरक्षा पर न्यायमूर्ति सप्रे के कड़े निर्देश..

दमोह। उच्चतम न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने जिले में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला न्यायालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के लिए हेलमेट का उपयोग अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बिना हेलमेट कार्यालय आने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं की जाए।


कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव, पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण फुलपगारे, अपर कलेक्टर राकेश मोहन त्रिपाठी सहित समिति के सदस्य मौजूद रहे।


बैठक में न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि देश में मध्यप्रदेश का कोई एक जिला ऐसा बने जो ‘जीरो फैटालिटी डिस्ट्रिक्ट’ के रूप में पहचान बनाए। उन्होंने कहा कि यदि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं सड़क पर उतरकर यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं तो लोगों में जागरूकता और अनुशासन स्वतः बढ़ेगा।


उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें और गंभीर चोटें परिवारों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होती हैं। इसलिए दुर्घटनाओं की रोकथाम केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें नियमित रूप से हों और दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।


न्यायमूर्ति सप्रे ने सभी सरकारी विभागों, स्कूलों और महाविद्यालयों में हेलमेट को अनिवार्य बनाने, वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, बीमा और वैध ड्राइविंग लाइसेंस सुनिश्चित कराने तथा सीएसआर फंड के माध्यम से हेलमेट वितरण और जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।


उन्होंने कहा कि छह माह बाद जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर किए गए कार्यों की दोबारा समीक्षा की जाएगी और देखा जाएगा कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई है।

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