रविवार को भी खुला रहा चंपत पिपरिया खरीदी केंद्र, नियमों पर उठे सवाल..
कलेक्टर के आदेश का हवाला देकर कराई गई तुलाई, दो दिन से इंतजार कर रहा था किसान..
दमोह। दमोह जिले के खरीदी केंद्र चंपत पिपरिया में रविवार के दिन भी गेहूं खरीदी और तुलाई किए जाने का मामला सामने आया है। प्रशासनिक नियमों के अनुसार रविवार को उपार्जन कार्य बंद रहता है, इसके बावजूद केंद्र पर तुलाई जारी रहने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मौके पर मौजूद किसान ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से अपनी उपज लेकर केंद्र पर खड़ा था, लेकिन तुलाई नहीं हो पा रही थी। रविवार को उसे तुलाई का मौका मिला। किसान का कहना था कि लंबे इंतजार और परेशानी के बाद आखिरकार रविवार को उसकी उपज की तुलाई की गई।
जब मौके पर मौजूद सर्वेयर से रविवार को खरीदी और तुलाई किए जाने को लेकर सवाल किया गया तो उसने बताया कि किसानों की परेशानी को देखते हुए यह कार्य कराया जा रहा है। सर्वेयर ने कहा कि “कलेक्टर साहब का निर्देश है कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए, इसलिए रविवार को भी तुलाई कराई जा रही है।”
समिति प्रबंधक बोले- रविवार को तौल नहीं होती, मुझे जानकारी नहीं..
मामले में सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब समिति प्रबंधक भगवत पटेल से बातचीत की गई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रविवार को केंद्र पर तौल नहीं होती। हालांकि जब उन्हें बताया गया कि उनके केंद्र पर रविवार को तुलाई चल रही है, तब उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और वे पता करके बताएंगे।
अब सवाल यह उठता है कि यदि केंद्र पर नियमों के विपरीत तुलाई हो रही थी तो समिति प्रबंधक को इसकी जानकारी कैसे नहीं थी। जबकि खरीदी केंद्र की पूरी जिम्मेदारी समिति प्रबंधक पर होती है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि केंद्र पर सक्रिय बिचौलियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मनमाने तरीके से खरीदी कार्य संचालित किया जा रहा है।
पहले भी विवादों में रहा है चंपत पिपरिया केंद्र..
चंपत पिपरिया समिति पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चाओं में रह चुकी है। चार दिन पहले ही कलेक्टर प्रताप नारायण यादव द्वारा निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं मिलने पर समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल लगातार बने हुए हैं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर कई-कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी तुलाई नहीं हो पाती। कई बार बारदाने की कमी बताकर किसानों को वापस लौटाया जाता है।
किसानों का कहना है कि यदि व्यवस्थाएं सही होतीं तो उन्हें रविवार जैसे अवकाश के दिन तुलाई कराने की नौबत नहीं आती।
निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल..
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव द्वारा जिले के खरीदी केंद्रों के लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि रविवार के दिन क्या किसी निरीक्षण टीम की तैनाती नहीं थी। यदि अवकाश के दिन नियमों के विरुद्ध खरीदी और तुलाई हो रही थी तो इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं हुई।
मामले में नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक लक्ष्मण राजावत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में अब किसानों और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर इस पूरे मामले में जिम्मेदारों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।



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