इमरजेंसी’ में भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस:

Spread the love

‘इमरजेंसी’ में भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस: गंभीर घायलों को परिजन निजी से ले गए जबलपुर, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल..

दमोह:दमोह जिले में एक बार फिर 108 एंबुलेंस सेवा की घोर लापरवाही सामने आई है। जबलपुर से बनवार लौटते समय सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए दो लोगों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली, जिसके चलते परिजनों को 2 घंटे तक इंतजार करना पड़ा और अंततः वे उन्हें निजी और किराए के वाहनों से जबलपुर ले जाने को मजबूर हुए।

सड़क दुर्घटना में दो लोग गंभीर घायल..

जबलपुर-बनवार मार्ग की टेक पर टू-व्हीलर वाहन के फिसलने से राजू नामदेव (उम्र 45) और जैकी जैन (उम्र 36) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें सिर में गंभीर चोट आई थी। परिजन उन्हें तत्काल अपने वाहन से दमोह जिला अस्पताल लाए। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत देखते हुए तुरंत जबलपुर रेफर कर दिया।

प्राइवेट एंबुलेंस की मिलीभगत’ का आरोप..

परिजनों का आरोप है कि घटना स्थल पर जब 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया, तो ऑपरेटर ने कुछ देर में जानकारी देने की बात कहकर टाल दिया। जिला अस्पताल में रेफर होने के बाद भी 108 के लिए कई बार कॉल किया गया, लेकिन 2 घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। मजबूरन, परिजनों को निजी एंबुलेंस किराए पर लेकर एक घायल को ऑक्सीजन सपोर्ट पर और दूसरे को स्वयं के वाहन से जबलपुर ले जाना पड़ा।

परिजनों ने आरोप लगाया कि यह प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों की मिलीभगत का नतीजा है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को समय पर सरकारी एंबुलेंस नहीं मिल पाती है और उन्हें जेब ढीली करनी पड़ती है।

रेड क्रॉस वाहन ने भी किया मना, ZM ने नहीं उठाया फोन..

परिजनों को पता चला कि जिला अस्पताल में रेड क्रॉस और स्टेट बैंक द्वारा प्रदान किए गए इमरजेंसी वाहन भी उपलब्ध रहते हैं। जब उन्होंने रेड क्रॉस वाहन चालक से संपर्क किया, तो चालक ने सुबह कैंप में जाने का बहाना बनाकर आने से मना कर दिया।वहीं, ZM (डिस्ट्रिक्ट मैनेजर) 108 को कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। बाद में ZM अधिकारी ने बताया कि दमोह लोकल के लिए उपलब्ध दो ALS और एक BLS (एंबुलेंस) गाड़ी कल रात ही जबलपुर गई होंगी, इसलिए उपलब्ध नहीं हो पाई। हालांकि, गाड़ियों के मूवमेंट की जानकारी देने से उन्होंने CMHO का लिखित आदेश न होने का हवाला देकर मना कर दिया।

कलेक्टर के निर्देश और इमरजेंसी ग्रुप भी बेअसर..

सूत्रों के अनुसार, यह समस्या पहली बार नहीं हुई है। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को भी इस बारे में कई बार अवगत कराया गया है और उनके निर्देश पर इमरजेंसी स्थिति के लिए एक ग्रुप भी बनाया गया है, ताकि डॉक्टर तत्काल एंबुलेंस बुला सकें। बावजूद इसके, रात में घटना होने पर न तो सिविल सर्जन, न CMHO कॉल अटेंड करते हैं और न ही प्रबंधन के लोग मौके पर आते हैं, केवल झूठा आश्वासन दिया जाता है।

अनफिट गाड़ियों का संचालन: कौन है जिम्मेदार ?

मामले में एक और गंभीर खुलासा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि रेड क्रॉस और स्टेट बैंक द्वारा दी गई इमरजेंसी गाड़ियां डीजल किराए पर चलती हैं। रेड क्रॉस की गाड़ी में ₹2000 का डीजल डलवाया जाता है, जबकि जबलपुर आने-जाने का खर्च 1200 से 1500 डीजल का है।

इससे भी बड़ी बात यह है कि स्टेट बैंक द्वारा प्रदान की गई इमरजेंसी गाड़ी का न तो फिटनेस है और न ही बीमा। ऐसे में अगर कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

जिला अस्पताल प्रबंधन या स्टेट बैंक? स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी खामी पर कोई जवाबदेह अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।गरीब और असहाय मरीजों को कब तक इस तरह मजबूरी में निजी जेब ढीली करनी पड़ेगी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

इनका यह है कहना – सिविल सर्जन डॉक्टर पहलाद पटेल से बात हुई है उनका कहना है इन गाड़ियों के अलावा और भी गाड़ियों की आवश्यकता है जिसकी रिक्वायर्डमेंट भेज दी गई है एवं रेड क्रॉस से संचालित गाड़ियों में केवल एक ही ड्राइवर है जिस वजह से गाड़ियों का सही सचालन नहीं हो पा रहा है एक और ड्राइवर की आवश्यकता है जिसकी नियुक्ति होना बाकी है।

About The Author

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com