लोकमाता अहिल्या से हुआ 21वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह का समापन
भारतीय इतिहास और नारी शक्ति की गौरव गाथा पर आधारित नाटक का हुआ मंचन
नाटक के माध्यम से कलाकारों ने बताए अहिल्याबाई होलकर के जीवन दर्शन
दमोह। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से जिले की अग्रणी नाट्य संस्था युवा नाट्य मंच के द्वारा आयोजित 21वें 5 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह का सोमवार को समापन हुआ। समापन दिवस पर स्थानीय नाट्य संस्था युवा नाट्य मंच के द्वारा नाटक लोकमाता अहिल्या का मंचन किया गया। डॉ उमेश चौरसिया द्वारा लिखित और वरिष्ठ रंगकर्मी राजीव अयाची के द्वारा निर्देशित यह नाटक होलकर साम्राज्य की महारानी
अहिल्या बाई होलकर के जीवन प्रसंगों से जुड़ा हुआ है और नाटक के माध्यम से उनके कुशल प्रशासन, न्यायप्रियता, धर्मपरायणता और विकास के कार्यों को दिखाया गया है। नाटक की कहानी में कुम्हेर के युद्ध में पति खडिराव होल्कर का निधन हो गया, इस समय अहिल्या बाई सती होने को आतुर होती है पर उनके ससुर मल्हार राव होलकर अपनी और मालवा की सौगंध देकर उन्हें सती होने से रोक देते हैं और मालवा का राज्य संभालने का आदेश देते हैं। ससुर मल्हार राव होलकर की मृत्यु के पश्चात मालवा साम्राज्य में प्रशासनिक कार्यों में गड़बड़ियां प्रारंभ होती है जिसका आरोप मालवा के दीवान गंगाधर राव तात्या (गंगोबा काका) अहिल्या बाई के एकमात्र पुत्र मालेराव होलकर पर डाल देता है मालेराव होलकर दिन रात नशे में धुत रहते थे। कुछ समय पश्चात उनके पुत्र मालेराव का भी निधन हो जाता है अहिल्या बाई टूट जाती है पर सूबेदार तुकोजी राव तात्या उन्हें ढाढस बंधाते है। इस अवसर का फायदा उठाते हुए मालवा पर अपना आधिपत्य करने के लिए रघुनाथ राव राघोबा वादा अपने साथियों के साथ मालवा पर आक्रमण करने की योजना बनाते है और इस योजना में मालवा के विश्वासपात्र रघुनाथ राव तात्या राघोवा उनका साथ देते हैं परंतु माता अहिल्या के विश्वासपात्र सूबेदार तुकोजी राव पडद्यंत्र की सारी योजनाओ को अपनी हिम्मत और सूझबूझ से विफल कर देते हैं। पारिवारिक और मालवा साम्राज्य की विपरीत स्थितियों के बावजूद उनको मालवा साम्राज्य के शासन की बागडोर संभाली, महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया और संपूर्ण राज्य को स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किया। वे प्रतिदिन जन-सुनवाई करती और लोगों की समस्याओं को सुनती थी। इस दौरान उन्होंने उन्होंने पूरे भारत में सैकड़ों मंदिरों, धर्मशालाओं, घाटों, कुओं और सड़कों का निर्माण करवाया जिनमें काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, वैद्यनाथ जैसे अनेक मंदिरों का पुनर्निर्माण शामिल है, उन्होंने न केवल अपनी सेना का कुशलतापूर्वक संचालन किया बल्कि महिलाओं की एक टुकड़ी बनाई। स्वावलंबन एवं स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण एवं आत्म सम्मान से जीवन यापन करने की दिशा में लोकमाता अहिल्या बाई ने कई कार्य किए।
पात्रों के सधे अभिनय से डाली जान
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की कहानियों में न सिर्फ देशकाल बल्कि कलाकारों का उसे समयकाल से खुद को जोड़े रहना भी जरूरी होता है। ऐसे में नाटक के निर्देशक राजीव अयाची और सहनिर्देशक अनिल खरे ने इन दोनों ही बातों का ध्यान रख कलाकारों से सधा हुआ अभिनय कराया है। अहिल्या बाई दीक्षा सेन, मल्हार राव अनिल खरे, तुकोजी राव बने बृजेंद्र राठौर अपने पात्रों में रमे नजर आते है। हरकुंवर रानी एवं महिला शिवानी बाल्मीकि, गंगाधर राव तात्या पंकज चतुर्वेदी, हरवा देवेश श्रीवास्तव,रघुनाथ राव राघोबा संजय खरे, सेनापति एवं भील हरिशोम खरे, बाल अहिल्या, सेविका एवं महिला नैन्सी गुप्ता सैनिक एवं अननतफंदी अनुभव श्रीवास्तव, सैनिक एवं दरबारी देवांशु राजपूत, नयन खरे, ऋषि खरारे, तेजस्व खरे, अनुभव श्रीवास्तव, उपेन्द्र सोनी, पारस गर्ग
ग्रामीण वैष्णवी रैकवार, राजेश श्रीवास्तव, अपूर्वा अयाची, आयुषी अयाची, गौरी रैकवार, श्रद्धा रैकवार ने अपने अपने पत्रों को बखूबी निभाया है। नाटक का संगीत अच्छा है और समकालीन वाद्य यंत्रों का शानदार प्रयोग संगीत में किया गया है।संगीत परिकल्पना दीक्षा सेन, अनुभव श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, देवेश श्रीवास्तव, लक्ष्मी शंकर सिंह सेंगर की है। वस्त्र विन्यास राजबहादुर अग्रवाल, हेमेंद्र सिंह चंदेल, रूप सज्जा अमृता जैन, अनिल खरे प्रकाश विन्यास राजीव अयाची, प्रचार प्रसार एवं मंच संचालन वैभव नायक का है।
समस्त दर्शकों का जताया आभार
समारोह को के समापन अवसर पर युवा नाट्य मंच के अध्यक्ष राजीव अयाची ने आयोजन के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान विधायक जयंत मलैया, कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, भावसिंह लोधी मासाब, समाजसेवी सत्येंद्र सिंह लोधी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महाकौशल प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख रामलाल जी पटेल, जिला कार्यवाहक कमलेश पटेल, विद्या भारती से सुरेंद्र चौरसिया, भारत विकास परिषद से राजीव बिल्थरे, डॉ रघुनंदन चिले, अमर सिंह त्रिपाल सिंह, देवनारायण,मालती असाटी, आलोक गोस्वामी, दीपक तिवारी,राकेश सोनी,प्रकाश सिंह ठाकुर,नरेंद्र दुबे, आलोक सोनवलकर, भाइयन जी, शैलेंद्र परिहार ,धर्मेंद्र मिश्रा, प्रदीप अग्रवाल, डॉ एनआर राठौर, डॉ पीएल शर्मा,ओसी जैन, डॉ अरुणा उज्जैनकर, कपिल खरे, डॉ संजय त्रिवेदी, एड भगवती श्रीवास्तव की उपस्तिथि रही।



More Stories
संकल्प और एलान: शिवराज बोले अब – स्वागत नहीं,सिर्फ़ पौधारोपण..गाय को राष्ट्र पशु बनाने की मांग, हिंदू विधायकों पर कलंक ?,रामभक्ति की बहस में सवाल: भगवान राम की माता का नाम ?
एस आई आर में बदले की भावना से समुदाय विशेष के कांटे जा रहे नाम – मानक पटेल..
जबलपुर नाका बस्ती में हिंदू सम्मेलन स्थल का विधिवत भूमिपूजन संपन्न, शांताअक्का जी रहीं उपस्थित..