दमोह में गैस एजेंसियों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
एक साथ 20 एजेंसियों की जांच में खुलीं अनियमितताएं, 2138 सिलेंडरों का मिला अंतर..
दमोह। प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर जिले में पहली बार सभी गैस एजेंसियों पर एक साथ की गई प्रशासनिक कार्रवाई में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। उपभोक्ताओं से लगातार मिल रही शिकायतों—समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिलने, निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूले जाने और उज्ज्वला योजना के दुरुपयोग—को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने यह संयुक्त अभियान चलाया।
कलेक्टर ने बताया कि कार्रवाई की पूरी रणनीति रात में तैयार की गई थी, ताकि किसी एजेंसी को पहले से सूचना न मिल सके। बुधवार सुबह ठीक 10 बजे जिले की सभी 20 गैस एजेंसियों पर एक साथ जांच शुरू कराई गई। इसके लिए 21 अलग-अलग जांच दल गठित किए गए थे। वहीं उज्ज्वला योजना के कार्डों की जांच के लिए विशेष टीम भी बनाई गई थी।
15 एजेंसियों में मिली गड़बड़ी, स्टॉक में बड़ा अंतर..
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 20 में से 15 गैस एजेंसियों में अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर में दर्ज सिलेंडरों और वास्तविक रूप से उपलब्ध सिलेंडरों की संख्या में बड़ा अंतर पाया गया। कुल 2138 सिलेंडरों का हिसाब मेल नहीं खाया। कुछ एजेंसियों में सिलेंडर कम पाए गए, जबकि कुछ जगह रिकॉर्ड में अधिक संख्या दर्ज थी।
प्रशासन का मानना है कि यह अंतर अवैध वितरण, कालाबाजारी या रिकॉर्ड में हेरफेर की ओर संकेत करता है। जांच दलों ने कई एजेंसियों के दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।
उज्ज्वला योजना के कार्ड जब्त, दुरुपयोग की आशंका..
तेंदूखेड़ा के 27 मील क्षेत्र स्थित महावीर हार्डवेयर ट्रेडर्स पर कार्रवाई के दौरान 23 गैस कार्ड जब्त किए गए। इनमें 22 कार्ड प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े बताए गए हैं, जबकि एक सामान्य घरेलू गैस कनेक्शन का कार्ड मिला।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार उज्ज्वला योजना के कार्ड संबंधित लाभार्थियों के पास होने चाहिए थे, लेकिन वे निजी व्यक्ति के कब्जे में पाए गए। इससे आशंका जताई जा रही है कि गरीब हितग्राहियों के नाम पर मिलने वाले सिलेंडरों का दुरुपयोग कर उन्हें अधिक कीमत पर बेचा जा रहा था।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई..
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया है कि जिन एजेंसियों में अनियमितताएं मिली हैं, उनके खिलाफ द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस प्रदाय आदेश-2000 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी, अधिक वसूली या नियम विरुद्ध सिलेंडर वितरण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने गैस एजेंसी संचालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में भी शिकायतें मिलीं तो लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
“पहली बार एक साथ जांच से सामने आई वास्तविक स्थिति”
कलेक्टर यादव ने कहा कि जिले में पहली बार सभी एजेंसियों पर एक साथ कार्रवाई की गई, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकी। उनका कहना था कि यदि अलग-अलग समय पर जांच होती तो एजेंसियों को व्यवस्था सुधारने का मौका मिल जाता और कई अनियमितताएं छिप जातीं।
प्रशासन अब सभी जांच दलों से विस्तृत रिपोर्ट मंगवा रहा है। गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने और अन्य कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद जिले की गैस एजेंसियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है, वहीं उपभोक्ताओं ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया



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