श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति और रामराज्य का संदेश, मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने दिलाया नशामुक्ति का संकल्प..

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श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति और रामराज्य का संदेश, मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने दिलाया नशामुक्ति का संकल्प..


नोहटा। नोहटा नगर में प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ सप्ताह में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। यह आयोजन मंत्री श्री लोधी के दादा-दादी एवं पूज्य चाचा जी की पुण्य स्मृति में किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।


कथावाचक पंडित उमाशंकर शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराते हुए भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं रास लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि की महिमा इतनी महान है कि बड़े-बड़े विद्वान भी वहां की रज प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हैं। भगवान का अवतार केवल उनकी करुणा और भक्तों के कल्याण के लिए होता है। वे केवल मनुष्यों ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों की भावनाओं का भी सम्मान करते हैं और उनके मनोरथ पूर्ण करते हैं।


कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गायों, बछड़ों, बंदरों और गोपियों सहित प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम और स्नेह का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की प्रत्येक भावना को समझते हैं और समय आने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। रासलीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की रासलीला ही श्रीमद्भागवत का सार है और यह दिव्य प्रेम, समर्पण तथा आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।


उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में योगमाया की सहायता से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रची गई रासलीला केवल एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के आत्मिक मिलन का प्रतीक है। जब भगवान की बांसुरी की धुन प्रत्येक गोपी को यह अनुभव कराती है कि यह केवल उसी के लिए बज रही है, तब यह ईश्वर और भक्त के बीच के आत्मिक संबंध को दर्शाती है।


कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का आकर्षक नाट्य रूपांतरण भी प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत झांकियों और धार्मिक प्रसंगों को श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर देखा।


इस अवसर पर मंत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रामराज्य की परिकल्पना पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के शासनकाल में प्रजा सुखी और संतुष्ट थी, जबकि आज के कलियुग में अधिकांश लोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं और दुखों से घिरे हुए हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि मनुष्य भगवान से दूर होकर माया और भौतिकता के मोह में फंस गया है। यदि समाज पुनः आध्यात्मिक मूल्यों और धर्म के मार्ग पर चले, तो रामराज्य जैसी आदर्श व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।


कथा के दौरान मंत्री श्री लोधी ने श्रद्धालुओं के साथ जयघोष कर नशामुक्ति का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने लोगों से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने तथा परिवार, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मंत्री श्री लोधी ने अपने परिवार, क्षेत्र एवं समस्त प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कथा में अवधेश सिंह, भाव सिंह, नितेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में सराबोर होकर कथा का श्रवण किया।

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