दमोह जिला अस्पताल में फिर लापरवाही का मामला, इलाज में चूक से वृद्धा की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप..

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दमोह जिला अस्पताल में फिर लापरवाही का मामला, इलाज में चूक से वृद्धा की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप..

दमोह। 24 जुलाई 2025
दमोह जिला अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लगातार सामने आ रही लापरवाही, दुर्व्यवहार और चिकित्सा व्यवस्थाओं की अनदेखी ने अस्पताल की साख पर बट्टा लगा दिया है। ताजा मामला कुलुआ-कुम्हारी क्षेत्र की 48 वर्षीय महिला शील रानी साहू की मौत से जुड़ा है, जिनके परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।

डॉक्टरों की अनदेखी से बिगड़ी हालत, फिर हुई मौत
शील रानी साहू को गंभीर स्थिति में दमोह जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों का कहना है कि हालत चिंताजनक होने के बावजूद 1 बजे दिन में डॉक्टरों ने उन्हें केवल पांच दिन की दवाइयां देकर डिस्चार्ज कर दिया। मृतका के पुत्र चंद्रभान साहू के अनुसार, उन्होंने कई बार डॉक्टर को ब्लड की अत्यधिक कमी और उनकी मां की खराब हालत के बारे में बताया, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया।

डिस्चार्ज के बाद भी परिजन 5 से 7 घंटे तक अस्पताल परिसर में ही रुके रहे, लेकिन जब उन्हें बेडशीट समेत नीचे उतार दिया गया, तब वे पास ही एक रिश्तेदार के घर चले गए। देर रात जब शील रानी की हालत और बिगड़ी तो वे दोबारा उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि करीब 20 मिनट तक कोई डॉक्टर नहीं आया और समय पर इलाज नहीं मिलने से वृद्धा की मौत हो गई।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू
घटना की सूचना मिलने पर परिजनों ने शव को घर नहीं ले जाकर तत्काल पुलिस को जानकारी दी। कोतवाली दमोह से सब-इंस्पेक्टर बीएस हजारी, प्रधान आरक्षक अभिषेक चौबे, आरक्षक पंकज सहित टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।

आरएमओ डॉ. चक्रेश ने कहा, “हमें परिजनों से गंभीर आरोपों की सूचना प्राप्त हुई है। शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उन पर उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा।”

घटना की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल भी अस्पताल पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

लगातार घटनाओं से अस्पताल की गिरती छवि
गौरतलब है कि दमोह जिला अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है। हाल ही में नवजात शिशुओं की अदला-बदली का मामला सामने आया था, जिसमें एफआईआर दर्ज की गई थी। मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी आम होती जा रही हैं।

अब देखना यह होगा कि जांच के बाद क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या यह घटना भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।

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