संकल्प और एलान: शिवराज बोले— अब स्वागत नहीं, सिर्फ़ पौधारोपण….
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जन्मदिन (5 मार्च) से पहले एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे न तो किसी से स्मृति-चिह्न लेंगे और न ही फूल-मालाओं से स्वागत कराएंगे।

शिवराज सिंह ने कहा कि अगर कोई उनका स्वागत करना चाहता है तो एक पेड़ लगाकर उसकी फोटो खींच ले और कह दे— “मामा, यह पेड़ लगाया है।” यही उनका स्वागत होगा।
उन्होंने अपील की है कि उनके जन्मदिन पर किसी भी तरह के बैनर, पोस्टर या होर्डिंग न लगाए जाएं, बल्कि केवल पौधारोपण किया जाए।
गाय को राष्ट्र पशु बनाने की मांग, हिंदू विधायकों पर कलंक ?
भोपाल उत्तर से कांग्रेस के मुस्लिम विधायक आतिफ अकील ने विधानसभा में गाय को राष्ट्र पशु घोषित करने की मांग उठाई है।
उन्होंने अशासकीय संकल्प पेश करते हुए कहा कि यदि हिंदू धर्म में गाय को मां माना जाता है, तो उसके सम्मान में उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही गाय की मृत्यु पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की भी बात कही।

इस मुद्दे पर संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बयान दिया कि यदि यह प्रस्ताव पारित नहीं होता है, तो यह हिंदू विधायकों पर बड़ा कलंक होगा।
रामभक्ति की बहस में सवाल: भगवान राम की माता का नाम ?
विधानसभा में जी-राम-जी योजना पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच रामभक्ति को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।


इसी बीच कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ने भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी से सवाल किया— भगवान राम की माता का नाम क्या था?
बताया जाता है कि इस सीधे सवाल पर विधायक नाम नहीं बता पाए और प्रश्न के उत्तर में प्रश्न ही करते रहे, जिससे सदन में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।
अब धर्म की नैया ही लगाएगी पार? पूर्व मंत्रियों की नई राजनीतिक राह..
मध्य प्रदेश की राजनीति में अब आउटडेटेड माने जा रहे भाजपा के दो पूर्व मंत्री— नरोत्तम मिश्रा और भूपेंद्र सिंह— धर्म के सहारे राजनीति की नई मंज़िल तलाशते दिख रहे हैं।

नरोत्तम मिश्रा ने ग्वालियर-डबरा क्षेत्र में नवग्रह शक्ति पीठ की स्थापना के बहाने शीर्ष संतों और महामंडलेश्वरों को एक मंच पर लाकर अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया।
वहीं पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने सागर में बड़े स्तर पर कथा महोत्सव और दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर आयोजन कर धार्मिक गतिविधियों में सक्रियता बढ़ा दी है, जिसे वे धार्मिक यज्ञ के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।



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